गोल्डन लेखमाला -2

मेरे अपने 60 मिनिट

अपने पिछले लेख में मैंने चर्चा की थी कि हम लायंस मिशन 1.5 पर इस वक्त कार्य कर रहे हैं. वे लेख उन लायन साथियों के लिए प्राथमिक था जिन्होंने हाल ही में लायंस क्लब की सदस्यता ली है. उस लेख का मुख्य उद्देश्य था उन लायन साथियों के भ्रम को दूर करना जो चुनावी माह में आरोप- प्रत्यारोपों के चलते जाने अनजाने मन में दुविधा पाल लेते हैं जिसकी परिणीति सदस्यता तयाग के साथ होती है. यही कारण है एक सामान्य लक्ष्य को मिशन 1.5 के रूप में परिवर्तित करने का. जितने लायन हर साल सदस्यता लेते हैं शायद उतने ही लायन सदस्यता छोड़ भी देते हैं. इस छोड़-पकड़ के खेल में हमारा ऑर्गेनाइजेशन वो प्रगति नहीं कर पा रहा है जो उसे करनी चाहिए.  अब सवाल ये है की एक लायन सदस्य जो किसी भी पद पर हो, किसी भी अवार्ड से अलंकृत हो, किस तरह से मिशन 1.5 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहयोग कर सकता है. 

वर्तमान सदस्यों को बनाये रखना

मैं हमेशा से ही इस सत्यता पर ज़ोर देता हूँ कि बाहर ढूँढने से पहले अपने अंदर खोजो. अर्थात् जो सदस्य हमारे साथ पिछले एक -दो साल में जुड़े हैं उन पर सबसे पहले ध्यान केंद्रित करो. इन लायन सदस्यों  के प्रायोजक (Sponsor),  किस तरह नए साथियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं इस पर पूरा ध्यान केंद्रित होना चाहिए. इनमें से कुछ बिंदु इस प्रकार हैं: 

1, नए लायंस सदस्य के शपथ उपरांत उसे लायंस किट दिया जाना चाहिए 

2. नए सदस्य को लायंस से संबंधित लिटरेचर उपलब्ध कराया जाए जिससे वे संगठन के विषय में जान सके 

3. उसे लायंस की वेबसाइट से अवश्य परिचित कराया जाए. उसे विभिन्न लीडर्स के रोल्स की जानकारी दी     जाए. 

4. स्पान्सर द्वारा मीटिंग्स की सूचना सदस्य को समय रहते दी जाए और हो सके तो उसे अपने साथ लेकर     मीटिंग में आया जाए. 

5. उसे क्लब के विभिन्न सदस्यों से मिलवा कर एक दूसरे की विशेषताओं के विषय में बताया जाए. 

6. नए सदस्य को किसी भी गतिविधि में रचनात्मक रूप से शामिल किया जाए जिससे वे अपने आप को     क्लब में सहयोगी मान सके.

7. सेवा गतिविधियों में उसे शामिल किया जाए और उसे ऐच्छिक अंशदान हेतु सुविधा दी जाए। 

8. क्लब के गतिविधियों की गरिमा को बरकरार रखा जाए. ऐसी कोई गतिविधि या बात जो लायंस सदस्यों    के अनुकूल न हो न की जाए. 

9. नए सदस्य को भोजन लेने के लिए स्पान्सर द्वारा या अन्य सदस्यों द्वारा आमंत्रित किया जाए. 

शुरुआती 6 माह नए सदस्य को क्लब में घुलने मिलने के लिए बहुत क़ीमती होते हैं. अगले 6 माह उसे लायंस के प्रतिमानों में ढालने हेतु उपयोगी होते हैं. और यदि वे अगले वर्ष बिना किसी हाँ-ना के कंटिन्यू कर लेता है तो आप मिशन 1.5 में सकारात्मक योगदान दे रहे होते हैं. 

पर ये सब हम सुनते आए हैं, पढ़ते आए हैं. जानते भी हैं, समझते भी हैं, महसूस भी करते हैं। इनको हम आचरण में ला नहीं पा रहे हैं। हम सब चाहते हैं की क्लब की कार्यवाही समय पर आरंभ हो पर क्या करें शहर में ट्रैफिक बहुत है। अध्यक्ष के नाते आपको समय से पहले पहुंचना चाहिए पर क्या करें चार साथियों ने एक ही गाड़ी में चलने हेतु वादा किया था। एक साथी को विलंब हो गया इसलिए मैं अध्यक्ष हो कर भी लेट हो गया। एजेंडा की क्या आवश्यकता है सब मालूम है मुझे क्या बोलना है। 

मैंने सचिव महोदय को फ़ोन लगाने को कहा था पर वे किसी कार्य में उलझ गए इसलिए फ़ोन नहीं लगा  पाये। 

और अंत में मैं सही हूँ बाक़ी सब ग़लत हैं। लायनवाद अब पहले जैसा नहीं रहा. 

ये सब कारण हम हर दिन देखते हैं और इसके साथ ही जीना पसंद करने लग गए हैं। क्योंकि ना तो हमने अपने आप को, अपने ऑर्गेनाइजेशन को, अपने समय को और न दूसरों के समय को गंभीरता से लिया है। 

मित्रो, आवश्यकता है अपने आप पर कार्य करने की। जिम्मेदारी समझने की और फ्रंट से लीड करने की। 

मेरे अपने 60 मिनट 

मित्रो, हममें से अधिकांश लोग सुबह ईश्वर का नाम लेते हैं, कोई पूजा करता है, कोई मंदिर जाता है, कोई नमाज़ पढ़ता है, मैं गुरुद्वारे जाता हूँ. आपने देखा होगा हम कितना भी व्यस्त हों पर इस रूटीन पर हम अडिग रहते हैं. आधा घंटा नहीं तो 20 मिनिट, नहीं तो 10 मिनिट, नहीं तो 5 मिन मगर हम रूटीन बिगड़ने नहीं देते. 

इसी तरह दोस्त, अपने आप पर अब कार्य करने का समय आ गया है. आपके अपने 60 मिनट. मतलब आपको अपने विकास हेतु, आपकी स्किल डेवलपमेंट हेतु कार्य करना होगा. आपको दिन में मात्र 1 घंटा निकलना होगा जिसमें आप एकांत में बैठ कर अपने आप से सवाल जवाब कर सकें. मैं समय पर कैसे चल सकता हूँ, मैं अंग्रेजी में बात करने हेतु क्या उपाय कर सकता हूँ, मैं अपने ऑफिस के हिसाब किताब को किस तरह से व्यवस्थित रख सकता हूँ, मैं लायन होने के नाते समाज के प्रति क्या योगदान कर सकता हूँ. मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है उस हेतु मैं क्या उपाय कर सकता हूँ, ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिनका उत्तर यदि आप जानना चाहेंगे तो आपको अवश्य मिलेगा.

और यदि मैं ये सब नहीं करता हूँ तो इनके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, इसका उत्तर भी आपको मालूम तो है पर उसे स्वीकार करना होगा. 

मेरा दावा है मित्रो, जिस दिन आपने अपने आप से प्रश्न करना आरम्भ कर दिया उसी दिन से आप अपने जीवन में सुधार देखने लग जाएँगे. हम ये मान बैठे हैं कि ये सब हम नहीं कर सकते. सब ऐसे ही चला करता है और ऐसे ही चलता रहेगा. 

कोशिश करके देखिए और जब आपको सकारात्मक परिणाम मिलना आरम्भ होंगे तो आपका उत्साह वर्धन होगा और आप क्लब के लिए, अपने परिवार के लिए और इस देश के लिए अधिक मूल्यवान बन सकेंगे.

मिशन 1.5 सिर्फ़ सोचने या बातें करने से नहीं प्राप्त होगा. इसे प्राप्त करने के लिए हमें अपने आप में सुधार करना होगा. और मैं और आप ये कर सकते हैं. शर्त यही है कि मेरे अपने 60 मिनट यदि सच में मेरे अपने हों तो. 

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April 8, 2025
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