***लायनवाद में बढ़ती अरुचि- कारण एवं निदान***
लगातार सुनने में आता है कि लायंस में अब वो रुचि नहीं रह गई है जो पहले हुआ करती थी। लायनवाद अब सिर्फ़ टाइम पास का जरिया बचा है। गाहे बगाहे हम अपने आप को व अपने संगठन को कोसते रहते हैं। मगर संगठन के पास अपने लक्ष्य निर्धारित हैं। लायंस की कार्यशैली का मैं दीवाना हूँ। जो अनुशासन, जो कमिटमेंट मैंने लायनवाद में अभी तक देखा है उस के अनुसार तो हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं जो हमें दिए गए हैं।
सबसे बड़ा लक्ष्य आज मिशन 1.5 के रूप में हमारे सामने है।
मिशन 1.5 जुलाई 2023 को बोस्टन कन्वेंशन में घोषित किया गया था. ये जून 2027 तक कार्यशील रहेगा. 02 से 06 जुलाई 2027 को वाशिगटन डी सी में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन में मिशन के परिणामों को स्वीकार किया जाएगा. आरम्भ हुए आज इतने दिन व्यतीत हो गए हैं। लगभग दो वर्ष अभी शेष रहते हैं। क्या कारण है कि इतना कुछ करने के बाद भी हम 13.5 लाख के आसपास ही घूम रहे हैं। आइए इन पर प्रकाश डालते हैं।
संभावित कारण
- काम कम बात ज़्यादा
हम मीटिंग में बहुत बात करते हैं। क्या क्या प्लान बनाते हैं। मगर जब काम करने की बारी आती है तो कन्नी काट लेते हैं। दिखाने को हम सदा ऐसा शो करते हैं जैसे हम से बड़ा कोई जानकार नहीं है। मगर जब क्रियांवन की बारी आती है तो व्यस्तता दिखाने लगते हैं।
क्या करें: जो बोलें वो करके दिखायें। बोलने के पहले सोचें। बड़बोला न बनें। पहले कर के दिखाएँ फिर बोलें। जो बोलें अच्छा बोलें। समय का सम्मान करें.
2. संगठन की सदा आलोचना : आलोचना करना या बुराई करना हमारा प्यारा शग़ल है। बात बात में हम बुराई करते हैं। उसमें हमें आनंद आता है। 90% अच्छी चीजें हमें दिखती नहीं हैं और 10% ग़लत चीजें हमें नियंत्रित करती हैं। हम समाज में अपने संगठन को बुरा बोलते रहते हैं और फिर आशा करते हैं कि हम 15 लाख सदस्यता का आंकड़ा छू लें।
क्या करें: कहावत है जिस थाली में खाते हो उसमें छेद न करें। अपने संगठन को बुरा नहीं बोलें। इसमें घाटा सिर्फ आपका है। पराए तो मजा करेंगे। यदि कोई ग़लत बात करता भी है तो उसे रोकें और उसका करेक्शन करें। मिशन 1.5 को प्राप्त करने में इस की बहुत बड़ी भूमिका है.
3. हमारी सोच में परिवर्तन: हम बहुत व्यवसायिक हो गए हैं। सोचते हैं कि हमारी 40% फीस अंतर्राष्ट्रीय को जा रही है। इस लिए क्या फायदा है लायंस अंतरराष्ट्रीय जॉइन करने का। इसी उहापोह में हम उलझे रहते हैं और अपने विकास को अवरुद्ध कर लेते हैं. यहाँ पर ये जानना आवश्यक बाई की हमारे द्वारा दिए गए शुल्कों से ही परमानेंट प्रोजेक्ट लगाये जाते हैं . पिछले वितीय वर्ष में LCIF ने भारत में US$8.29 Million की168 ग्रांट भारत में दी गई हैं. अभी हाल ही में लायंस क्लब इंदौर महानगर को ब्लड बैंक हेतु ग्रांट सैंक्शन की गई है.
क्या करें: अपनी सोच का दायरा विकसित करें। हम जेट युग में जी रहे हैं। एक फ़िल्म देखने जाओ तो प्रति व्यक्ति 1000 का खर्च आ जाता है। यदि हमें वर्ष भर के मेन मेम्बर के 4500 रू देने भी पड़ते हैं तो इसे वापस लेने का प्रोविजन भी तो है। कई प्रकार की ग्रांट हैं जिन्हें आप ले सकते हैं. उसके लिए स्थाई प्रोजेक्ट आप को बनाना होंगे। आप ये सोच सकते हैं कि देश भर में जो भी स्थायी प्रोजेक्ट लगते हैं उनमें आपका अंशदान रहता है। अब तो ये पैसा भी देश के बाहर नहीं जाता है ये देश में ही सेवा कार्यों में व्यय किया जाता है।
4. पास्ट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स की उदासीनता: डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद गरिमामय पद है। एक लायन, डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने हेतु एडी चोटी का जोर लगाता है। वे अथाह धन खर्च करता है, समय देता है, अपने व्यापार को नजर अंदाज करता है, सभी तरह के जोड़ तोड़ करता है, अपने परिवार की उपेक्षा करता है पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनता है। एक वर्ष के बाद जब वे पद से हटता है तब न जाने उसे क्या हो जाता है कि वे सुप्तावस्था को प्राप्त हो जाता है।
क्या करें: पद से सेवा निवृत होते ही आपके पास क्लब्स को मार्गदर्शित करने का प्लान होना चाहिए। जो क्लब अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे हैं उनको आप गोद ले सकते हैं। अपने होम क्लब को सुदृढ़ करना आपकी प्राथमिकताओं में शुमार होना चाहिए। क्लब की प्रतिष्ठा है तो आपकी प्रतिष्ठा है। यदि आपका क्लब ही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है तो फिर आप दूसरे क्लब के विषय में क्या मार्गदर्शन दे पाएंगे। क्लबों से जीवंत संपर्क बना कर रखिए।
सतारूढ़ डिस्ट्रिक्ट गवर्नर से अच्छे संबंध बना कर रखिए। उसके कार्यकर्मों की सार्वजनिक आलोचना मत करिए। यदि आप किसी चीज से सहमत नहीं हैं तो उसे निजी रूप से बात कर के उसे सलाह दीजिए। दर्शक नहीं, पात्र बनिये। डिस्ट्रिक्ट के लायंस द्वारा की जा रही सकारात्मक टिप्पणियों की प्रशंसा करिए वहीं किसी भी तरह की जा रही नकारात्मक बातों, घटनाओं और आपसी वाद विवाद की एक स्वस्थ सोच के साथ अपनी बात कहने का साहस रखिये। मेरा क्या जाता है, मुझे क्या लेना देना, मैं क्यों कहूँ, मैं क्यों बुरा बनूँ इस तरह के विचारों से आप अपने पास्ट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के ओहदे का अनादर ही कर रहे होते हैं।
5. कोई स्पष्ट कार्यक्रम नहीं: हम भारतीय विलक्षण प्रतिभा के धनी है। शायद यही कारण है कि पूरे विश्व में हम फैले हैं और उच्च पद हमें हासिल हैं। पर ऐसे कुछ चुनिंदा लोग ही हैं जो अपने और अपने देश के लिए शोहरत बटोर रहे हैं। अधिकांश भारतीयों में स्पष्ट लक्ष्य का अभाव है। उनके पास कोई रोडमैप नहीं है। इसलिए वे छोटे छोटे काम करके अपने आप को सीमित रखते हैं और फिर क़िस्मत को दोष देते रहते हैं।
क्या करें: हर ट्रेनिंग प्रोग्राम में गोल सेटिंग पर बात होती है। इसे जीवन में लागू करें। स्पष्ट दिशा निर्देश अपने लिए लागू करें और उन पर चलने का प्रयत्न करें। लायंस में एक से एक ट्रेनर हैं. उनकी बातों को सुनने का प्रयत्न कीजिए.
6. लायनवाद से अनभिज्ञ व्यक्तियों का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनना: डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का पद गरिमामय पद है। इस पद पर लायंस का ज्ञान रखने वाला ही आरूढ़ होना चाहिए. जिस तरह से बस चलाने वाले को बस चलाने का ज्ञान, ट्रेन चलाने वाले को ट्रेन चलाने का ज्ञान एवं प्लेन उड़ाने वाले को प्लेन उड़ाने का ज्ञान आवश्यक है उसी तरह से लायंस डिस्ट्रिक्ट चलाने के लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नर को लायंस की बारीकियों का ज्ञान होना चाहिए। अक्सर ऐसा होता नहीं है। आर्थिक बल, बाहु बल के दम पर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बन जाते हैं या बना दिए जाते हैं और उसका परिणाम लायंस के पतन से होता है.
क्या करें: अपने आस पास नजर घुमायें और देखें की संगठन के प्रति किस व्यक्ति का कितना समर्पण है। उसे लायनवाद का कितना ज्ञान है। ऐसे व्यत्कियों को चिह्नित करें और उन्हें प्रोत्साहित करें कि वे उच्च पदों हेतु आगे आयें। विडंबना ये है जो काबिल है वे दलदल में उतरना नहीं चाहता। ऐसे व्यक्तियों के लिए सकारात्मक माहौल बनायें। यदि कोई व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने हेतु बहुत आतुर है तो उसे अपने आप को शिक्षित करना चाहिए. सिर्फ़ एक वर्ष लायन सदस्यों को फ़ोन पर जन्म दिन व वैवाहिक वर्षगाँठ की बधाई देकर या प्रेरक विचारों को हर दिन पोस्ट करके आप वोट हासिल कर लेंगे पर लायंस का नुकसान आप कहीं न कहीं करते रहेंगे.
7. क्लब पदाधिकारियों के संस्थापन को इवेंट में परिवर्तित कर देना: ये सच है कि किसी भी संगठन को समझने कि लिए हमें उस संगठन के आधारभूत ढांचे का अध्ययन करना होता है। हम क्लब के पदाधिकारियों को हर वर्ष संस्थापित करते हैं।
यहाँ पर ये ध्यान रखा जाए की पदाधिकारियों का संस्थापन कराया जाता है। उन्हें शपथ नहीं दिलाई जाती। संस्थापन करवाने हेतु संस्थापित अधिकारी आमंत्रित होता है। शपथ विधि अधिकारी जैसी कोई पोजीशन नहीं होती है।
शपथ और संस्थापन में अंतर होता है। शपथ वहाँ ग्रहण कराई जाती है जहां अथॉरिटी दी जाती है। शपथ लेने के बाद आपको अधिकार दिए जाते हैं की आप किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोई एक्शन ले सकते हैं। सेवा संगठनों में ये इसलिए लागू नहीं होता क्योंकि सेवा मन से होती है। उसे क़ानून से हकाला नहीं जा सकता है। यदि कोई जोन चेयरपर्सन अपनी रिपोर्ट नहीं भेजता है जो डिस्ट्रिक्ट गवर्नर उसे दंड नहीं दे सकता है। पर यदि आप हेलमेट नहीं लगाते हैं तो आपका चालान बनाया जा सकता है और आप पर आर्थिक पेनल्टी लगाई जा सकती है।
आज कल ये बहुतायत से देखने में आ रहा है कि संस्थापन को हमने इवेंट में बदल दिया है। जो संस्थापन अधिकारी जितनी अच्छी स्क्रिप्ट बना कर लाता है वे उतना बड़ा हीरो कहलाता है। कोई भगवान के नाम पर संस्थापन करवाता है तो कोई फिल्मी दुनिया के कलाकारों के लेकर स्क्रिप्ट बनाता है। कोई डॉन या अंडर वर्ल्ड की थीम पर ज़ोर देता है तो कोई किसी नाटक को देखकर नाटक रचता है। इन सबके बीच में पद के उत्तरदायित्व कहीं गुम हो जाते हैं। जो पदाधिकारी संस्थापित हो रहा होता है उसे मालूम ही नहीं होता की उसे अमिताभ बच्चन जैसी एक्टिंग वर्ष भर करनी है या कोई जिम्मेदारी भी निभानी है। संस्थापन अधिकारी अपने आप को बेहतर साबित करने में लगा रहता है और लायंस की आत्मा कहीं न कहीं तिरोहित होती रहती है
क्या करें: कृपया सीधा व स्पष्ट संस्थापन करवायें। लाखों लायन्स ने हमारे अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष लायन ए पी सिंह को संस्थापित कराए जाने का वीडियो देखा होगा। किस तरह से निवृतमान होते अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष लायन फ़ैब्रिशियो ने उन्हें अपने पद पर संस्थापित किया। इस संस्थापन को, दुनिया की सबसे बड़ी फ़िल्म बना कर, किया जा सकता था। पर लायंस के संविधान के अनुसार उन्हें सीधी सच्ची भाषा में पद और गोपनीयता का पाठ पढ़ाया गया।
एक बात और गठान बाँध लें। लायंस के संस्थापन में धर्मग्रंथों और भगवान को बीच में नहीं लाना चाहिए। लायंस विभिन्न धर्मों का समूह है। लायंस में हम हिंदू, मुस्लिम सिख ईसाई नहीं हैं वरन् सेवा करने वाले मनुष्य हैं।धर्म के नाम पर किसी के मन में भी कोई कुंठा जन्म ले सकती है जिसका प्रभाव पूरे वर्ष उसके पद के साथ किए जा रहे कार्यों में परिलक्षित होता है। मैं इसका स्पष्ट गवाह हूँ, जब संस्थापित पदाधिकारियों ने अपना विरोध दर्ज करवाया है। इसलिए संस्थापन सीधा सीधा करवाइए और इस बात पर जोर दीजिए की पद ग्रहण करता लायन पदाधिकारी अपने पद के उत्तरदायित्वों को स्पष्ट रूप से आत्मसात कर ले। इससे आप लायंस की सेवा करते हुए अपने पद के साथ न्याय कर सकेंगे।
अंत में सारांश:
- जो बोलें वो करके दिखायें।
- संगठन की आलोचना बिल्कुल नहीं करें।
- सोच को विस्तृत करें। दुनिया को अपना मित्र मानें
- पास्ट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अपनी महता समझें और उसे कार्य रूप में परिणीत करें।
- लक्ष्य बनायें और उन्हें प्राप्त करें। चाहे वे नेतृत्व का लक्ष्य हो चाहे सदस्यता वृद्धि का.
- लायनवाद की समझ रखने वालों को ही महत्वपूर्ण पद पर आसीन करें
- संस्थापन समारोह की गरिमा समझें और उसे इवेंट बनाने से परहेज करें
इन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप अपने संगठन लायंस इंटरनेशनल को सुदृढ़ करने में सहयोग कर सकते हैं। आपके प्रयत्नों से हम मिशन 1.5 अवश्य पा सकते हैं. लायंस की तिरोहित होती हुई चमक को भी हम बनाये रख सानते हैं.